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गृह, गोपन, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग
मुख्य रूप से
कानून व्यवस्था को चुस्त एवं दुरूस्त बनाये रखने हेतु उत्तरदायी
है। इन विभागों में नीति विषयक निर्णय
कराने, बजट तैयार कर
विधायिका से अनुमोदन के पश्चात् धनराशि अवमुक्त करने, सी.आई.डी. को
प्रकरण संदर्भित करने, दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध अभियोजन का
निर्णय लेने, शस्त्र लाईसेंसों की सीमा विस्तार, राष्ट्रीय
मानवाधिकार आयोग से प्राप्त मामलों का अनुश्रवण करने, राज्य
मानवाधिकार आयोग से संबंधित कार्यों को सम्पादित करने, विधानसभा/विधान
परिषद में प्रश्नों के उत्तर देने, भारत सरकार से पुलिस संबंधी
मामलों में समन्वय तथा राज्य में कानून एवं व्यवस्था
से सम्बन्धित कार्यों का निष्पादन करते हैं।
विभाग द्वारा नागरिकों,
अति विशिष्ट व्यक्तियों एवं महत्वपूर्ण अधिष्ठानों की सुरक्षा
व्यवस्था की सुनिश्चित की जाती है (महानुभावों, राज्य अतिथिगण)
पुलिस एवं कारागार प्रशासन विभाग में पुलिस
आधुनिकीकरण योजना
एवं कारागार आधुनिकीकरण योजना के अन्तर्गत
नीतिनिर्धारण बजट व्यवस्था एवं व्यय का
अनुश्रवण मुख्य कार्य हैं।
उपरोक्त कार्यों को सम्पादित करने हेतु प्रमुख
सचिव के सहायतार्थ चार सचिव,
दस विशेष सचिव,
एक ओ.एस.डी. एवं बारह उप/अनुसचिव
कार्यरत हैं।
विभागाध्यक्ष स्तर पर पुलिस
महानिदेशक के अतिरिक्त, महानिदेशक (अभियोजन), महानिदेशक (सी० बी०
सी० आई० डी०), महानिदेशक (अग्निशमन सेवाएं), महानिदेशक (तकनीकी
सेवाएं), महानिदेशक (प्रशिक्षण सेवाएं), महानिदेशक (विशेष जांच) एवं
महानिदेशक (कारागार एवं सुधार विभाग) नियुक्त हैं। अपर पुलिस
महानिदेशक स्तर के अधिकारी के अधीन भ्रष्टाचार निवारण संगठन
कार्यरत हैं जिन्हें इस कार्यालय में प्राप्त शिकायतें संदर्भित की
जाती हैं।
पुलिस विभाग की आवास एवं भवन संबंधी आवश्यकताओं
की पूर्ति हेतु उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम स्थापित है, जो
एक स्वायत्तशासी संस्था है।
शासन स्तर पर
प्रमुखत: भारतीय पुलिस सेवा एवं प्रान्तीय
पुलिस सेवा के अधिकारियों के सेवा संबंधी मामले निस्तारित किये जाते
हैं।
पुलिस एवं जेल सुधार पर नीति निर्धारण का कार्य भी इस विभाग में
किया जाता है।
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